Film Review: अमेरिका को बचाओ अभियान में इस बार ‘Interceptor’ ने किया अच्छा काम

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‘Interceptor’ Film Review: अपने उपन्यासों की 20 भाषाओं में 70 लाख से अधिक कॉपियां बेचने वाले मैथ्यू रेली का दुर्भाग्य देखिये कि जब उन्होंने अपनी पहली किताब 1996 में मात्र 19 साल की उम्र में लिख ली थी तो पूरे ऑस्ट्रेलिया में एक भी प्रकाशक उस किताब को हाथ लगाने को तैयार नहीं हुआ था. बैंक से लोन लेकर किसी तरह मैथ्यू ने इस किताब की 1000 कॉपियां प्रकाशित की जिसमें से एक कॉपी, पैन मैकमिलन की केट पैटरसन के हाथ लगी.

मैथ्यू की किस्मत ने करवट बदली और उस दिन के बाद से उन्होंने पीछे मुड़ के नहीं देखा. ऑस्ट्रलिया के रहने वाले मैथ्यू की किताबों का उनके लाखों पाठकों को बेसब्री से इंतज़ार रहता है. उनकी अधिकांश किताबें एक्शन थ्रिलर होती हैं और हीरो को कठिनतम परिस्थितियों में कई तरह की गुत्थियों को सुलझा कर अपने गंतव्य तक पहुंचना होता है. मैथ्यू की किताबों पर फिल्म और वेब सीरीज बनाने की योजनाओं पर बहुत साल से काम चल रहा है, मैथ्यू अपनी पत्नी की अकाल मृत्यु के बाद ऑस्ट्रेलिया छोड़ कर लॉस एंजेल्स चले आये.

अपनी किताबों को पर्दे पर उतारते देखने का इंतज़ार मैथ्यू को कुछ पसंद नहीं आ रहा था तो उन्होंने एक कहानी लिखी “इंटरसेप्टर”. इसी कहानी को नेटफ्लिक्स ने पर्दे पर उतारा है. फिल्म बेहतरीन है. मैथ्यू रैली के प्रशंसक हैं तो देख डालिये. अमेरिका दुनिया का एकलौता ऐसा देश है, वहां की फिल्मों के मुताबिक, जहां हर दिन कोई न कोई प्रलय आना तय होती है, फिर कोई एक नागरिक उठ कर सभी मुसीबतों के सामना कर के, अमेरिका को बचा लेता है.

अमेरिका बचाओ अभियान में कभी ज्वालामुखी तो कभी खूंखार शार्क, कभी एलियंस तो कभी दुश्मन देश… अमेरिका का खात्मा करने पर आमादा हैं. इंटरसेप्टर में ये दुश्मन रूस है. अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी की न्यूक्लियर मिसाइल से निपटने के लिए अमेरिका ने दो जगह एंटी-मिसाइल तैनात की हैं. एक अलास्का में और दूसरी है समुद्र के बीचों बीच स्थित एक अज्ञात लोकेशन. जैसे ही पता चलता है कि रूस की तरह से कोई न्यूक्लियर मिसाइल छोड़ी गयी है, इन दोनों लोकेशंस में से किसी एक से एंटी-मिसाइल छोड़ी जाती है जो न्यूक्लियर मिसाइल से टकरा कर उसे हवा में नष्ट कर देती है.

अलास्का वाली लोकेशन में कुछ आतंकवादी घुस कर सभी को मार देते हैं और पूरा सिस्टम तेज़ाब डाल कर जला देते हैं. दूसरी ओर, इन आतंवादियों का दूसरा गुट रूस की 16 न्यूक्लियर मिसाइल चुरा लेता है और अमेरिका के अलगअ-लग शहरों पर निशाना लगा देता है. अब सारी ज़िम्मेदारी समुद्री केंद्र की होती है कि वो रूस की मिसाइल को रोके. समुद्री केंद्र में तैनात कप्तान जेजे कॉलिन्स (एल्सा) अपनी बहादुरी, जांबाज़ी और तेज़ दिमाग से केंद्र पर कब्ज़ा करने आये आतंकवादी एलेग्जेंडर केसेल (ल्यूक) का सामना करती है और रूस की मिसाइल को रोकने के लिए समुद्री केंद्र से एंटी-मिसाइल छोड़ने में भी कामयाब हो जाती है.

एल्सा पटाकी को भारतीय दर्शक ‘फ़ास्ट एंड फ्यूरियस” सीरीज में ड्वेन जॉनसन की पार्टनर के तौर पर देख चुके हैं. एल्सा के पति ऑस्ट्रेलिया के अभिनेता क्रिस हेमस्वर्थ को मार्वल के फैंस “थॉर” के रूप में जानते हैं. थिएटर, मॉडलिंग, वेब सीरीज और कुछ फिल्में कर चुकी एल्सा के करियर के चंद महत्वपूर्ण रोल्स में सबसे शक्तिशाली रोल है इंटरसेप्टर में कप्तान जे जे कॉलिन्स का. एक्शन से भरपूर इस रोल में एल्सा का काम है ज़ोरदार. उन्होंने कई दिनों तक रोज़ाना 5 घंटे प्रैक्टिस कर के एक्शन के लिए खुद को तैयार किया. फिल्म में उनके पति क्रिस हेमस्वर्थ भी एक अतिथि भूमिका में हैं. विलन का रोल ल्यूक ब्रेसी ने निभाया है. उनके हिस्से जितनी भूमिका आयी थी उसका सही निर्वहन कर लिया.

भारतीय दर्शक इसमें एक भारतीय किरदार पाएंगे कारपोरल राहुल शाह जिसकी भूमिका में हैं मायेन मेहता. शेष एक्टर्स के पास करने को कुछ खास है नहीं. जॉर्ज लिडल ने फिल्म की प्रोडक्शन डिज़ाइन बेहतरीन की है. समुद्र के बीचों बीच एक एंटी-मिसाइल लॉन्च केंद्र की कल्पना और उसकी सम्पूर्ण संरचना की कल्पना पहली बार नहीं की गयी है लेकिन इस फिल्म का सेट थोड़ा विश्वासयोग्य लगता है. बजट ज़्यादा न हो जाए इसलिए तकरीबन 95% फिल्म एक ही सेट पर फिल्मायी गयी है. रोवन माहेर की एडिटिंग दर्शकों को बांध के रखती है और रोमांच कहीं भी कम नहीं होने देती.

लेखक मैथ्यू रेली की बतौर निर्देशक ये पहली फिल्म है. उनकी स्क्रिप्ट सभी को पसंद आयी थी लेकिन बतौर निर्देशक उनके हाथ में कमान देने के लिए प्रोड्यूसर तैयार नहीं थे. जैसे तैसे सब फिल्म करने के लिए तैयार हुए और मैथ्यू का पदार्पण सफल हुआ. गालियां हर अमेरिकी फिल्म का गहना है और एक्शन फिल्मों में तो ये कुछ ज़्यादा ही होती है. इस फिल्म में भी यही हुआ है. मैथ्यू रैली के चाहने वालों को तुरंत नेटफ्लिक्स की ओर जाना चाहिए और इस फिल्म को देखना चाहिए. अमेरिका एक बार फिर खतरे में हैं वो भी रूस की मिसाइलों से.

डिटेल्ड रेटिंग

कहानी :
स्क्रिनप्ल :
डायरेक्शन :
संगीत :

Tags: Film review



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