अक्षय कुमार की ‘रामसेतु’ का ट्रेलर देख लिया क्या? जान लीजिए इतिहास और इससे जुड़ा विवाद

0
15


राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी रचना ‘हुंकार’ में कहा है- ‘सुनूं क्या सिंधु मैं गर्जन तुम्हारा, स्वयं युग-धर्म की हुंकार हूं मैं…’. लगता है ‘चाणक्य’ बनाकर भारत के सांस्कृतिक इतिहास की कड़ियां जोड़ने वाले चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने सिंधु अर्थात् समुद्र की गर्जना को सुन लिया है. वे इस ‘युग के धर्म’ को फिर से रुपहले पर्दे पर उतार लाए हैं. वे दर्शकों के लिए ‘रामसेतु’ (Ram Setu) लेकर आ रहे हैं. राम और रामायण से जुड़ी प्रभाष की फिल्म ‘आदिपुरुष’ का टीजर अपनी ‘खामियों’ के कारण खूब आलोचनाएं झेल चुका है. रामसेतु भी रामायण से निकला विषय है. लोगों को इस फिल्म का इंतजार है.

‘रामसेतु’ के मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार हैं, जो द्विवेदी के साथ ‘पृथ्वीराज’ में भी थे. इस जोड़ी की पिछली फिल्म को आलोचकों की तगड़ी ‘क्लास’ झेलनी पड़ी थी. दर्शकों से भी निराशा ही हाथ लगी. जाहिर है ‘रामसेतु’ से उम्मीदें सिर्फ इस जोड़ी को ही नहीं, दर्शकों को भी है. पिछले करीब दो दशकों से यह मुद्दा संसद से सड़क तक चर्चित रहा है. रामसेतु पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, जिन पर अदालत भी विचार कर ही रही है. इस फिल्म का ट्रेलर आने के बाद रामसेतु के इतिहास और विवाद पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

इतिहासः हिंदुओं का रामसेतु, मुसलमानों का एडम्स ब्रिज
भारत के नक्शे पर दक्षिणी छोर से सटा श्रीलंका, इस जम्बुद्वीप का हिस्सा रहा है. रामायण की कथा में चारों तरफ समुद्र से घिरी रावण की लंका का जिक्र आता है, जहां तक पहुंचने के लिए सेतु का निर्माण आवश्यक था. सीता-हरण के बाद जब राम ने लंका पर चढ़ाई की तो वहां तक पहुंचने के लिए नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण किया, जिसे रामसेतु कहा गया. हिंदू धार्मिक मान्यताएं रामसेतु को आस्था से जोड़ती हैं. वहीं आधुनिक काल के वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक जलीय संरचना के रूप में देखते हैं. वैज्ञानिक इससे जुड़े धार्मिक तथ्य की जांच-परख के लिए सागर के अंदर तक उतरे.

सामुद्रिक विज्ञान के विशेषज्ञों ने अब तक के अनुसंधान के आधार पर इस संरचना को भौगोलिक घटनाओं से जन्मी आकृति बताया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक मूंगे की चट्टानों पर समुद्री रेत के जमने से करीब 48 किलोमीटर लंबी पुल-नुमा संरचना बनी है. यह भारत के दक्षिण-पूर्वी छोर पर स्थित रामेश्वरम से श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित मन्नार द्वीप को जोड़ती है. रामसेतु से जुड़ी मुस्लिम अवधारणा भी है, जो इसे आदम का पुल (Adam’s Bridge) कहती है. इस्लामिक मान्यता है कि आदम इसी पुल के रास्ते श्रीलंका में स्थित पहाड़ की चोटी पर पहुंचा था और वहां 1000 साल तक एक पैर पर खड़े रहकर पश्चाताप किया.

वर्तमानः रामसेतु और सेतुसमुद्रम योजना
अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने के लिए समुद्र में एक ही रास्ता है. भारत और श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री सीमा को पार करना. यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग हिंद महासागर से होकर गुजरता है. यूरोप या अमेरिका से आने वाले भारी-भरकम मालवाहक जहाज हों या विमानवाहक पोत, इन्हें चेन्नई या विजाग जैसे भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए हिंद महासागर का चक्कर लगाना पड़ता है. भारत और श्रीलंका की सीमा पार कर बंगाल की खाड़ी में पहुंचना पड़ता है. साल 2003 में केंद्र की एनडीए सरकार ने सोचा कि क्यों न भारत और श्रीलंका के बीच में स्थित समुद्र के रास्ते इन जहाजों को सीधे चेन्नई, विजाग जैसे बंदरगाहों तक पहुंचाने के लिए एक रास्ता बनाया जाए. विशेषज्ञों ने इस योजना को नाम दिया सेतुसमुद्रम.

इस योजना के तहत भारत से श्रीलंका के समुद्री तट के बीच 83 किलोमीटर लंबा डीप-वाटर चैनल यानी जलमार्ग बनाया जाना है. इससे विदेशों से आने वाले जहाजों के लिए एक नया मार्ग विकसित होगा, बल्कि कम समय में ये जहाज बंगाल की खाड़ी में स्थित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे. अभी पश्चिमी देशों से आने वाले जहाज श्रीलंका का पूरा चक्कर लगाकर भारत के पूर्वी तटीय इलाकों तक पहुंच पाते हैं. सेतुसमुद्रम योजना के पूरा होने के बाद उन्हें यह अतिरिक्त दूरी नहीं तय करनी होगी. इसमें 10 से लेकर 30 घंटों तक का समय बचेगा.

विवादः कैसे अस्तित्व में आया रामसेतु, होगा अनुसंधान
योजना पर काम शुरू होता, इसके पहले सरकार बदल गई. 2005 में यूपीए सरकार ने इस पर फिर से काम शुरू किया, तो विपक्ष ने इस योजना को हिंदू आस्था पर प्रहार बताते हुए अदालत में मामला दाखिल कर दिया. विवाद बढ़ा तो सरकार सुस्त पड़ गई, लेकिन अदालत में मामला चलता रहा. पिछले साल एक बार फिर अदालत में जब इस पर चर्चा शुरू हुई तो सरकार ने रामसेतु पर शोध कराने को मंजूरी दी. इसके तहत समुद्र के भीतर जाकर वैज्ञानिक इस सामुद्रिक संरचना के अस्तित्व का अनुसंधान करेंगे.

Tags: Akshay kumar, Entertainment Special, Ram Setu



Source link