पुण्यतिथि : किशोर कुमार को खंडवा वालों ने इस तरह याद किया, समाधि पर चढ़ाया दूध जलेबी का प्रसाद

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खंडवा. देश के नक्शे में खंडवा ढूंढ़ने में भले ही आपको वक्त लगे लेकिन किशोर कुमार से जुड़ी कोई भी बात याद करेंगे तो वहां खंडवा पूरी शिद्धत से आपको नजर आ जाएगा. मरहूम गायक-अभिनेता किशोर कुमार की आज पुण्यतिथि है. खंडवा उनका अपना शहर था. जन्म स्थली ऐसी जो ताउम्र उनके दिल-दिमाग पर छायी रही. वो हर सांस में और हर बात में खंडवा को याद करते थे. उनकी समाधि भी खंडवा में ही है. उनकी याद में आज समाधि स्थल पर उनके चाहने वालों का मेला लगा और दूध-जलेबी का प्रसाद चढ़ाया गया.

किशोर कुमार को अपनी जन्मस्थली और शहर खंडवा से काफी लगाव था. बॉलीवुड हो हॉलीवुड हो या टॉलीवुड…किशोर कुमार की पहचान ही किशोर कुमार खंडवा वाले के रूप में होती थी. वो जब भी देश-विदेश जाते थे तो अपना परिचय किशोर कुमार खंडवा वाले के रूप में ही देते थे. आज उसी खंडवा वाले किशोर कुमार की 35 वीं पुण्यतिथि है. देश के अलग अलग हिस्से से लोग उनकी समाधि पर आकर उन्हें सुरों के माध्यम से श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

दूध-जलेबी खाएंगे खंडवे में बस जाएंगे
किशोर कुमार को अपने पैतृक शहर खंडवा से जीवन भर लगाव रहा. फिर चाहें वो फिल्म हो या देश-विदेशो में किया जाने वाला कोई स्टेज शो. अपने कार्यक्रम की शुरुआत में परिचय देने में खंडवा का नाम वो लेना नही भूलते थे. अंदाज कुछ इस तरह का था. जिसके खंडवा वासी आज भी मुरीद हैं. इतना ही नही बॉलीवुड में रहकर किशोर कुमार को खंडवा की लालाजी की जलेबी भी हमेशा याद आती रही. बचपन में जिस लालाजी की जलेबी वो खाते थे वो दुकान खंडवा में आज भी वैसी ही बरकरार है. मुंबई में भी हमेशा वो लाला की जलेबी की चर्चा किया करते थे. इसके लिए किशोर कुमार ने एक जुमला भी निकाला था. “दूध-जलेबी खाएंगे खंडवे में बस जाएंगे”. यही कारण है कि उनकी समाधि पर उनकी पसंदीदा दूध जलेबी का भोग हर साल लगाया जाता है.

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अधूरा रह गया सपना
किशोर कुमार की समाधि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे खंडवा महापौर एवं खंडवा विधायक सहित तमाम जनप्रतिनिधियों ने किशोर कुमार के प्रिय नगमे गुनगुना कर उन्हें गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी. खंडवा महापौर अमृता यादव ने तेरे मेरे मिलन की ये रैना गाकर करके उन्हें अद्भुत श्रद्धांजलि दी. 90 के दशक में बॉलीवुड से किशोर कुमार का अचानक मोहभंग हो गया था. मायानगरी से दूर हो किशोर कुमार खंडवा में ही बसना चाहते थे. उस साल अपनी पत्नी और जॉनी वाकर के साथ एक प्रोग्राम भी उन्होंने खंडवा के तपाड़िया गार्डन में दिया था. साल 1987 की दीपावली इसी घर में मनाकर नई शुरुआत करने की तैयारी थी. लेकिन उनका यह सपना..सपना बनकर ही रह गया और 13 अक्टूबर 1987 को वे हम सबको छोड़कर चले गए.

खंडवा में सदा के लिए बस गए किशोर दा
किशोर कुमार की आखिरी इच्छा के अनुरूप उनके पार्थिव शरीर को मुम्बई से खंडवा लाया गया और सभी के लिये इसे दर्शनार्थ रखा गया. उसके बाद खंडवा के गौरीकुंज के उनके बंगले से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गयी. यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनके समाधिस्थल पर रोज लोग आते हैं और श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं. आज भले ही किशोर कुमार हमारे बीच नही हैं लेकिन अपने गीतों और अदाकारी के जरिए हमेशा जिंदा रहेंगे.

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