Govind Singh Dotasara Commented On Bjp Shekhawati Meeting – Politics: ‘बीजेपी की सभा में बाहर से लाए गए लोग…और वो कह थे शेर की मांद में चुनौती देने आए हैं’

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गोविंद सिंह डोटासरा

गोविंद सिंह डोटासरा
– फोटो : सोशल मीडिया

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राजस्थान बीजेपी ने केंद्र सरकार के इशारे पर शेखावाटी के लक्ष्मणगढ़ में आक्रोश सभा के नाम से बैठक बुलाई, जिसे किसानों की सभा संबोधित किया। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सभा में 30 हजार किसानों के भाग लेने का दावा किया था, लेकिन तीन हजार बीजेपी कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों से बैठक में शामिल हुए। शेखावाटी की इस सभा में कोई भी किसान शामिल नहीं हुआ। बैठक में भाग लेने वाले 65 प्रतिशत लोग राठौड़ की ओर से बैनर लगी बसों में भरकर चूरू से लाए गए थे।

बता दें कि उपरोक्त बातें गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय जयपुर पर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा, बैठक से पहले यह अनुमानित था कि इसका उद्देश्य लक्ष्मणगढ़ में बीजेपी प्रत्याशी को लांच करना होगा। लेकिन बैठक के बाद स्पष्ट हुआ कि राठौड़ ने शेखावाटी से स्वयं को बीजेपी में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार लांच करने के लिए लक्ष्मणगढ़ में बैठक आयोजित की। बैठक में लक्ष्मणगढ़ से भाग लेने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं की संख्या चार अंकों में भी नहीं पहुंच सकी, जबकि किसानों ने तो दूरी बनाई रखी।

वक्ताओं ने सिर्फ दो मिनट बोले…
उन्होंने कहा, बीजेपी ने बाजरे की समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग को लेकर बैठक करना प्रचारित किया था। किन्तु यहां बोलने वाले 12-13 वक्ताओं में से केवल दो ने दो मिनट के अल्प समय के लिए किसानों और कृषि पर अपना संबोधन दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि लक्ष्मणगढ़ से बीजेपी के विधानसभा चुनाव प्रत्याशी रहे नेता को अपना परिचय देना पड़ा। जो यह दर्शाता है कि जिस स्थान पर सभा हुई, उस क्षेत्र के लोगों की बैठक में भागीदारी न के बराबर थी।

पूंजी पति मित्रों को लाभ दिलाने में लगी बीजेपी…
डोटासरा ने कहा, 700 किसानों की मौत की जिम्मेदार बीजेपी की केंद्र सरकार ने अपने पूंजी पति मित्रों को लाभ दिलाने के लिए तीन काले कृषि कानून लागू किए थे। किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी जैसे शब्दों से संबोधित किया था। 15 महीने तक किसानों को खून के आंसू रूलाकर तीन काले कृषि कानून वापस लिए गए। इसलिए बीजेपी को किसानों की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, यूपीए की डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने किसानों के 72 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफकर किसानों को राहत पहुंचाई थी। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने 14 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण चुकाकर किसानों को राहत प्रदान की है। प्रदेश के किसानों के सभी सहकारी बैंकों के ऋण राजस्थान सरकार की ओर से चुका दिए गए। राष्ट्रीयकृत बैंकों और राष्ट्रीय सहकारी बैंकों के किसानों के ऋणों का वन टाइम सैटलमेंट करने के लिए प्रधानमंत्री और सहकारिता मंत्री को राज्य सरकार ने पत्र लिखा, जिसका जवाब केंद्र सरकार की तरफ से आज तक नहीं दिया गया। उल्टे लोकसभा और राज्यसभा में केन्द्रीय कृषि मंत्री ने वक्तव्य दिया था कि किसानों की कर्ज माफी की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। बल्कि कर्ज माफी को केंद्र सरकार ने रेवड़ी बांटने की संज्ञा प्रदान की।

उन्होंने कहा, बीजेपी के नेता अपने चंद कार्यकर्ताओं को बुलाकर किसान हितैषी होने का ढोंग रच रहे हैं, यह कृत्य घोर निन्दनीय है। कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र राजनैतिक दल है, जिसकी सरकार ने किसानों के प्रदेश में 14 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किए। जब केंद्र सरकार ने तीन काले कृषि कानून लागू किए थे, तब राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा सत्र बुलाकर काले कृषि कानूनों का प्रभाव समाप्त करने वाले विधेयक विधानसभा में पारित करवाए। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में आज तक कोई निर्णय नहीं लिया है। राठौड़ ने सभा में कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के खाते में दो हजार रुपये डाले हैं, यह वक्तव्य किसानों के स्वाभिमान पर चोट करने वाला है। क्योंकि किसानों की हैसियत कम आंकने का कार्य बीजेपी नेताओं ने किया है। 

खरीद के मुद्दे पर बैठक बुलाई…
उन्होंने कहा, जिस बाजरे की खरीद के मुद्दे पर मीटिंग बुलाई गई। उस बाजरे की फसल को पैरों तले रौंदने का काम बीजेपी नेताओं ने किया। किसान अथक मेहनत से फसल तैयार करता है। बीजेपी नेताओं ने पार्टी की नौटंकी के लिए ऐसा कृत्य किया, जो घोर निन्दनीय है। उन्होंने कहा, प्रदेश में बाजरा बहुतायत में होता है, 6 से 8 महीने में बाजरा खराब हो जाता है। यदि प्रदेश सरकार बाजरे को क्रय करे तो उसकी खपत प्रदेश में नहीं हो सकेगी और सरकार की ओर से 3,600 करोड़ रुपये व्यय करने पर भी बाजरे की उपयोगिता नहीं होगी।

उन्होंने कहा, बीजेपी नेताओं को यदि बाजरा उगाने वाले किसानों की चिंता होती तो आठ साल से केंद्र में बीजेपी का शासन है और पूर्व में पांच साल बीजेपी का प्रदेश में शासन रहा है। लेकिन बीजेपी सरकार ने कभी एक रुपये का भी बाजरे की खरीद नहीं की। इनके नेता केवल और केवल नौटंकी करने के आदि हो चुके हैं, इन्होंने चार साल में एक बार भी किसानों के मुद्दों पर अपनी आवाज नहीं उठाई।

‘शेर की मांद में चुनौती देने आए’…
सीकर के लक्ष्मणगढ़ में आयोजित मीटिंग में उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने एक बात अच्छी कही कि शेर की मांद में चुनौती देने आए हैं, किन्तु सत्य यह है कि शेर लक्ष्मणगढ़ की जनता है, जिसने उन्हें तीन बार चुनाव जिताकर विधानसभा में भेजा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासन के पांच साल में मैंने विधानसभा में तत्कालीन बीजेपी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरकर नकेल डालने का कार्य किया था। लक्ष्मणगढ़ की जनता ने मुझ पर विश्वास जताया और बीजेपी की सभा में शामिल न होकर साबित कर दिया है कि लक्ष्मणगढ़ की जनता मेरी तरफ से किए गए विकास कार्यों से संतुष्ट होकर मेरे साथ है। क्योंकि लक्ष्मणगढ़ की जनता ने मुझे तीन बार चुनाव जिताकर अपना प्रतिनिधत्व करने का मौका दिया।

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राजस्थान बीजेपी ने केंद्र सरकार के इशारे पर शेखावाटी के लक्ष्मणगढ़ में आक्रोश सभा के नाम से बैठक बुलाई, जिसे किसानों की सभा संबोधित किया। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सभा में 30 हजार किसानों के भाग लेने का दावा किया था, लेकिन तीन हजार बीजेपी कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों से बैठक में शामिल हुए। शेखावाटी की इस सभा में कोई भी किसान शामिल नहीं हुआ। बैठक में भाग लेने वाले 65 प्रतिशत लोग राठौड़ की ओर से बैनर लगी बसों में भरकर चूरू से लाए गए थे।

बता दें कि उपरोक्त बातें गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय जयपुर पर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने कहा, बैठक से पहले यह अनुमानित था कि इसका उद्देश्य लक्ष्मणगढ़ में बीजेपी प्रत्याशी को लांच करना होगा। लेकिन बैठक के बाद स्पष्ट हुआ कि राठौड़ ने शेखावाटी से स्वयं को बीजेपी में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार लांच करने के लिए लक्ष्मणगढ़ में बैठक आयोजित की। बैठक में लक्ष्मणगढ़ से भाग लेने वाले बीजेपी कार्यकर्ताओं की संख्या चार अंकों में भी नहीं पहुंच सकी, जबकि किसानों ने तो दूरी बनाई रखी।

वक्ताओं ने सिर्फ दो मिनट बोले…

उन्होंने कहा, बीजेपी ने बाजरे की समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग को लेकर बैठक करना प्रचारित किया था। किन्तु यहां बोलने वाले 12-13 वक्ताओं में से केवल दो ने दो मिनट के अल्प समय के लिए किसानों और कृषि पर अपना संबोधन दिया। आश्चर्य की बात तो यह है कि लक्ष्मणगढ़ से बीजेपी के विधानसभा चुनाव प्रत्याशी रहे नेता को अपना परिचय देना पड़ा। जो यह दर्शाता है कि जिस स्थान पर सभा हुई, उस क्षेत्र के लोगों की बैठक में भागीदारी न के बराबर थी।

पूंजी पति मित्रों को लाभ दिलाने में लगी बीजेपी…

डोटासरा ने कहा, 700 किसानों की मौत की जिम्मेदार बीजेपी की केंद्र सरकार ने अपने पूंजी पति मित्रों को लाभ दिलाने के लिए तीन काले कृषि कानून लागू किए थे। किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी जैसे शब्दों से संबोधित किया था। 15 महीने तक किसानों को खून के आंसू रूलाकर तीन काले कृषि कानून वापस लिए गए। इसलिए बीजेपी को किसानों की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, यूपीए की डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने किसानों के 72 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफकर किसानों को राहत पहुंचाई थी। राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने 14 हजार करोड़ रुपये के कृषि ऋण चुकाकर किसानों को राहत प्रदान की है। प्रदेश के किसानों के सभी सहकारी बैंकों के ऋण राजस्थान सरकार की ओर से चुका दिए गए। राष्ट्रीयकृत बैंकों और राष्ट्रीय सहकारी बैंकों के किसानों के ऋणों का वन टाइम सैटलमेंट करने के लिए प्रधानमंत्री और सहकारिता मंत्री को राज्य सरकार ने पत्र लिखा, जिसका जवाब केंद्र सरकार की तरफ से आज तक नहीं दिया गया। उल्टे लोकसभा और राज्यसभा में केन्द्रीय कृषि मंत्री ने वक्तव्य दिया था कि किसानों की कर्ज माफी की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। बल्कि कर्ज माफी को केंद्र सरकार ने रेवड़ी बांटने की संज्ञा प्रदान की।

उन्होंने कहा, बीजेपी के नेता अपने चंद कार्यकर्ताओं को बुलाकर किसान हितैषी होने का ढोंग रच रहे हैं, यह कृत्य घोर निन्दनीय है। कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र राजनैतिक दल है, जिसकी सरकार ने किसानों के प्रदेश में 14 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किए। जब केंद्र सरकार ने तीन काले कृषि कानून लागू किए थे, तब राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा सत्र बुलाकर काले कृषि कानूनों का प्रभाव समाप्त करने वाले विधेयक विधानसभा में पारित करवाए। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में आज तक कोई निर्णय नहीं लिया है। राठौड़ ने सभा में कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के खाते में दो हजार रुपये डाले हैं, यह वक्तव्य किसानों के स्वाभिमान पर चोट करने वाला है। क्योंकि किसानों की हैसियत कम आंकने का कार्य बीजेपी नेताओं ने किया है। 

खरीद के मुद्दे पर बैठक बुलाई…

उन्होंने कहा, जिस बाजरे की खरीद के मुद्दे पर मीटिंग बुलाई गई। उस बाजरे की फसल को पैरों तले रौंदने का काम बीजेपी नेताओं ने किया। किसान अथक मेहनत से फसल तैयार करता है। बीजेपी नेताओं ने पार्टी की नौटंकी के लिए ऐसा कृत्य किया, जो घोर निन्दनीय है। उन्होंने कहा, प्रदेश में बाजरा बहुतायत में होता है, 6 से 8 महीने में बाजरा खराब हो जाता है। यदि प्रदेश सरकार बाजरे को क्रय करे तो उसकी खपत प्रदेश में नहीं हो सकेगी और सरकार की ओर से 3,600 करोड़ रुपये व्यय करने पर भी बाजरे की उपयोगिता नहीं होगी।

उन्होंने कहा, बीजेपी नेताओं को यदि बाजरा उगाने वाले किसानों की चिंता होती तो आठ साल से केंद्र में बीजेपी का शासन है और पूर्व में पांच साल बीजेपी का प्रदेश में शासन रहा है। लेकिन बीजेपी सरकार ने कभी एक रुपये का भी बाजरे की खरीद नहीं की। इनके नेता केवल और केवल नौटंकी करने के आदि हो चुके हैं, इन्होंने चार साल में एक बार भी किसानों के मुद्दों पर अपनी आवाज नहीं उठाई।

‘शेर की मांद में चुनौती देने आए’…

सीकर के लक्ष्मणगढ़ में आयोजित मीटिंग में उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने एक बात अच्छी कही कि शेर की मांद में चुनौती देने आए हैं, किन्तु सत्य यह है कि शेर लक्ष्मणगढ़ की जनता है, जिसने उन्हें तीन बार चुनाव जिताकर विधानसभा में भेजा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासन के पांच साल में मैंने विधानसभा में तत्कालीन बीजेपी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरकर नकेल डालने का कार्य किया था। लक्ष्मणगढ़ की जनता ने मुझ पर विश्वास जताया और बीजेपी की सभा में शामिल न होकर साबित कर दिया है कि लक्ष्मणगढ़ की जनता मेरी तरफ से किए गए विकास कार्यों से संतुष्ट होकर मेरे साथ है। क्योंकि लक्ष्मणगढ़ की जनता ने मुझे तीन बार चुनाव जिताकर अपना प्रतिनिधत्व करने का मौका दिया।

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