Three Daughters Performed Last Rites Of Father In Dungarpur – Rajasthan News: डूंगरपुर में तीन बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा, किया अंतिम संस्कार

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बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार

बेटियों ने किया पिता का अंतिम संस्कार
– फोटो : Social Media

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हिंदू मान्यता के अनुसार लड़कियां श्मशान में नहीं जाती है। पिता की अर्थी को बेटा कंधा देता है लेकिन डूंगरपुर में तीन बेटियों ने सामाजिक रीतियां तोड़कर मिसाल कायम की। डूंगरपुर जिले के तहसील क्षेत्र सागवाड़ा अंतर्गत वरदा गांव में तीन बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। 

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार वरदा गांव के आजाद भाटिया 30 साल से कुवैत में काम करते थे। 10 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से आजाद की मौत हो गई थी। कुवैत से उनका शव शुक्रवार 13 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव में पहुंचा। आजाद को कोई बेटा नहीं है। ऐसे में उनकी तीन बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कांधा दिया। आजाद की सबसे बड़ी बेटी निशा, दूसरी रितु और सबसे छोटी बेटी का नाम पायल है। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी हैं।
बेटियों ने न सिर्फ श्मशान तक कंधा दिया बल्कि श्मशान जाकर अपने पिता को मुखाग्नि भी दी। रुंधे गले, बहते आंसुओं के बीच तीनों बेटियों ने साबित किया कि बेटे और बेटियां सब बराबर होते हैं।

जैसे ही बेटियां घर से पिता को कंधा देते हुए निकली, सबकी आंखें नम हो गई। आजाद का अंतिम संस्कार वरदा गांव में भाटिया समाज के मुक्तिधाम में रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया गया। बड़ी बेटी निशा ने बताया कि हमारा भाई नहीं था। ऐसे में पिता ने ही हमें कभी भाई की कमी नहीं होने दी और हाथ से हाथ मिला कर बराबरी करना सिखाया।

पत्नी ने रखा था करवाचौथ का व्रत

आजाद भाटिया की पत्नी सन्तोष देवी लगभग 15 सालों से करवाचौथ का व्रत रखती आई हैं। इस साल भी व्रत रखा था लेकिन उनके पति की मौत हो गई। 

विस्तार

हिंदू मान्यता के अनुसार लड़कियां श्मशान में नहीं जाती है। पिता की अर्थी को बेटा कंधा देता है लेकिन डूंगरपुर में तीन बेटियों ने सामाजिक रीतियां तोड़कर मिसाल कायम की। डूंगरपुर जिले के तहसील क्षेत्र सागवाड़ा अंतर्गत वरदा गांव में तीन बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। 


मीडिया रिपोर्टस के अनुसार वरदा गांव के आजाद भाटिया 30 साल से कुवैत में काम करते थे। 10 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से आजाद की मौत हो गई थी। कुवैत से उनका शव शुक्रवार 13 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव में पहुंचा। आजाद को कोई बेटा नहीं है। ऐसे में उनकी तीन बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कांधा दिया। आजाद की सबसे बड़ी बेटी निशा, दूसरी रितु और सबसे छोटी बेटी का नाम पायल है। तीनों बेटियों की शादी हो चुकी हैं।

बेटियों ने न सिर्फ श्मशान तक कंधा दिया बल्कि श्मशान जाकर अपने पिता को मुखाग्नि भी दी। रुंधे गले, बहते आंसुओं के बीच तीनों बेटियों ने साबित किया कि बेटे और बेटियां सब बराबर होते हैं।


जैसे ही बेटियां घर से पिता को कंधा देते हुए निकली, सबकी आंखें नम हो गई। आजाद का अंतिम संस्कार वरदा गांव में भाटिया समाज के मुक्तिधाम में रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया गया। बड़ी बेटी निशा ने बताया कि हमारा भाई नहीं था। ऐसे में पिता ने ही हमें कभी भाई की कमी नहीं होने दी और हाथ से हाथ मिला कर बराबरी करना सिखाया।

पत्नी ने रखा था करवाचौथ का व्रत

आजाद भाटिया की पत्नी सन्तोष देवी लगभग 15 सालों से करवाचौथ का व्रत रखती आई हैं। इस साल भी व्रत रखा था लेकिन उनके पति की मौत हो गई। 

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