don’t make the kids stubborn बच्चों की हर फरमाइश पूरी कर उन्हें जिद्दी मत बनाइए 

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don't make the kids stubborn
जिद्दी बच्चो की हर फरमाइश पूरी करने पर जिद्दी हों जातें हैं

जिद्दी बच्चों की सभी फरमाइशें पूरी करते रहेंगे तो वो ज़िद्दी बन ही जाएंगे और दोषी आप ही होंगे don’t make the kids stubborn

राजस्थान की आवाज/ हनुमान राम चौधरी

अगर आपका बेटा या बेटी दस साल का या इससे भी छोटा है और हर वक्त कोई न कोई फरमाइश करता रहता है. उसे रुपए का महत्व समझाएँ ..

don't make the kids stubborn
जिद्दी बच्चो की हर फरमाइश पूरी करने पर जिद्दी हों जातें हैं

अगर आप बच्चे की हर डिमांड पूरी करते रहेंगे तो बच्चा तो फरमाइश करेगा ही. उसे पता है कि उसकी हर फरमाइश पूरी की जाएगी, खुश होकर या परेशान होकर. बात तो घरवाले मानेंगे. बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को जरा- सा भी दुखी नहीं देखना चाहते. वो कहते भी हैं कि कमाते किसके लिए हैं ? बीवी- बच्चों के लिए ही न ? जो ऐसा सोचते हैं उनके लिए जवाब है कि सही है आप बच्चों के लिए कमाते हैं लेकिन जिस रुपए से बच्चा बिगड़े, उसकी कीमत न जाने, आदतें बदल जाए, वो किसी कॉमप्लेक्स का शिकार हो जाए, जिद्दी बन जाए, लोगों का सम्मान करना बंद कर दे, दूसरे की भावनाओं की कद्र न करे, उसमें घमंड आ जाए, वो अपने मित्रो को नीचा दिखाने के लिए तत्पर रहे, तो क्या आप चाहेंगे कि आपके बच्चे में इस तरह की कोई भी बात घर कर जाए(करें) .

आप उसके लिए कमाइए लेकिन उसकी बेहतर शिक्षा के लिए जमा कीजिए, उसकी परवरिश में कमी न रहे, उसे किसी बात की कमी न हो, उसे अच्छा पहनने को दें, अच्छा और स्वस्थ भोजन खिलाइए, सबसे बड़ी बात उसकी शिक्षा में होने वाले खर्चे न रुकें. उसे मुफ़्त या फ्री में देकर उसकी आदत मत बिगाड़िए बेहतर भविष्य के साथ बच्चा बेहतर नागरिक भी बने, इसकी जिम्मेवारी भी आप पर ही है. अगर आप इसी तरह उसकी फरमाइशें पूरी करते रहे तो उसे कभी भी रुपयों का महत्व नहीं मालूम होगा. वो यह कभी नहीं समझ पाएगा कि उसे किस चीज की जरूरत है ? वो किसी भी चीज के बारे में सोचेगा और आपसे रुपए लेकर तुरंत पूरी कर लेगा. उसे कभी खुद की जरूरतें समझ नहीं आएंगी. वो ये नहीं समझ पाएगा कि जरूरत, आदत और शौक में क्या अंतर होता है. उसमें जरूरतों की समझ नहीं आएगी. उसके दिमाग में यही रहेगा कि जो अच्छा लगता है, वो खरीद लेना चाहिए. मैं जो चाहूंगा खरीद लूंगा.

आप इस पर भी विचार करिये कि और क्या- क्या हो सकता है ? अगर बचपन से आप उसकी सभी फरमाइश पूरी करते रहे और कभी आपको ये महसूस हो कि इसकी आदत बिगड़ गई है, हर वक्त फास्ट फूड ही खाता रहता है, इससे तो नुकसान होगा और ये सोचकर आप उसकी बातें मानना बंद कर दें या कम कर दें तो वो जिद्दी बनेगा. हो सकता है जिद पूरी न होने पर वो खाना- पीना बंद कर दे ! उसका मन न लगे ! उसका गुस्सा बढ़ जाए ! चिड़चिड़ाहट बढ़ जाए ! तो बताइए इसके लिए दोषी कौन है- वो बच्चा या आप ? पहले आपने उसकी हर फरमाइश पूरी की और कहते रहे, उसे पिज्जा बहुत पसंद है. हम उसे उसकी पसंद का ही खिलाएंगे. उसे चॉकलेट बहुत पसंद है तो आप उसे नई- नई तरह की महंगी से महंगी चॉकलेट लाकर देते रहे. जब भी उसका मन किया और उसने आपसे चॉकलेट के लिए रुपए मांगे, आपने उसे दे दिये लेकिन धीरे -धीरे लगने लगा कि उसके दांत खराब हो रहे हैं और आप उसे चॉकलेट खाने से मना करते हैं, तो क्या होगा ? आपने खुद ही तो आदत डाली. वो मां से नहीं तो पापा से रुपए मांगेगा. घर में अन्य सदस्य हैं तो उनसे मांगेगा. कोई न कोई दे ही देगा. उसे ये समझ नहीं आएगा कि चॉकलेट खाने का मन है तो हर बार 100 रुपए की ही चाकलेट खाई जाए, यह जरूरी नहीं. चॉकलेट कम रुपयों की भी मिलती है और अच्छी होती है.

वो खिलौना खरीदने जाएगा तो उसे ये समझ नहीं होगी कि कार, जीप 50, 100, 200 रुपए की भी अच्छी मिल सकती हैं लेकिन उसे वही महंगी वाली 800 या हजार रुपए की ही कार चाहिए होगी और आप उसकी खुशी के लिए उसे खरीद देंगे. उसे हमेशा यही लगेगा कि महंगी चीज ही अच्छी होती है. वो कभी कम कीमत की चीज नहीं खरीदेगा. उसे कभी न तो रुपयों की कीमत समझ में आएगी, न ही कम कीमत की चीजें पसंद आएंगी बल्कि जिसके पास कम कीमत की चीजें होंगी, वो उसे हीन भावना से देखेगा. उसमें सुपीरियॉरिटी की भावना भी घर कर जाएगी. वो हमेशा ही सुपीरियर रहना चाहेगा, जो उसके व्यक्तित्व के लिए कहीं से अच्छा नहीं. जो कमतर होगा, जिस बच्चे के पास सस्ते खिलौने होंगे, उसे देखकर उसमें घमंड आएगा और कहीं किसी के पास उससे अच्छे खिलौने होंगे तो उसके मन में आएगा कि मेरे पास ये क्यूं नहीं ? मुझसे बेहतर गेम उसके पास कैसे ? वो आपसे जिद्द करेगा और आप बिना सोचे- समझे, बिना बात किए बिना जरूरत जाने उसे दिला देंगे, तो आप अनजाने में ही उसके अहम् को संतुष्ट करेंगे. ये अहम् उसके भविष्य के लिए बहुत कष्टकारी होगा.

इसकी परिणिति ये भी हो सकती है कि वो दोस्तों से शर्त लगाए कि मैं फलां चीज ले सकता हूं या मेरे पापा- मम्मी मुझसे इतना प्यार करते हैं कि मैं कहूंगा कि चांद चाहिए तो वो भी लाकर देंगे. दूसरा बच्चा भी कहता है कि मेरे भी पापा- मम्मी भी मुझसे बहुत प्यार करते हैं. वो मेरी भी हर बात मानते हैं और किसी महंगे खिलौने पर शर्त लग जाए तो क्या होगा ? हो सकता है कि आपकी सामर्थ्य उतना महंगा खिलौना खरीदने की न हो या दूसरे बच्चे के अभिभावक की उतनी सामर्थ्य न हो. तो उस सूरत में या तो आपके बच्चे में हीन भावना आएगी या फिर दूसरा बच्चा मायूस होगा. कॉम्प्लैक्स के साथ विजयी मुस्कान आपके बच्चे के चेहरे पर होगी. आपका बच्चा आपसे ‘आई लव यू पापा’ कहकर लिपटेगा मगर ‘ये आई लव यू’ किस रूप में कहा गया ये आपको समझ नहीं आएगा.!

Umed aanjana samdari
नशे की लत के शिकार लोगों को कहीं पर भी सम्मान नहीं मिलता युवा हो रहें हैं नशे के आदि उम्मेद आंजणा

✍️उम्मेद आंजणा समदड़ी 🙏🙏

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