राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर 2 बच्चों की मां घूंघट से बिकिनी का सफर, थाइलैंड में जीता गोल्ड

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प्रिया सिंह बॉडी बिल्डर
राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर 2 बच्चों की मां घूंघट से बिकिनी का सफर, थाइलैंड में जीता गोल्ड

राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर 2 बच्चों की मां घूंघट से बिकिनी का सफर, थाइलैंड में जीता गोल्ड

प्रिया सिंह बॉडी बिल्डर
राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर 2 बच्चों की मां घूंघट से बिकिनी का सफर, थाइलैंड में जीता गोल्ड

2 बच्चों की मां, राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर: घूंघट से बिकिनी का सफर, थाइलैंड में जीता गोल्ड, लेकिन सरकार से नाराज

प्रिया सिंह राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली हैं। ग्रामीण परिवार में जन्मी प्रिया की 8 साल की उम्र में शादी हो गई। शादी के बाद 2 बच्चे…। इसके बाद प्रिया की असली जिंदगी शुरू हुई।

दो बच्चों की मां बनने के बाद प्रिया ने पुरुषों के वर्चस्व वाले बॉडी बिल्डिंग के फील्ड में हाथ आजमाए । दरअसल, प्रिया ने घर चलाने के लिए जिम में नौकरी शुरू की थी। यहीं से फिटनेस को लेकर रुचि पैदा हो गई। रोज घंटों जिम में पसीना बहाया। इसी मेहनत का नतीजा रहा कि बॉडी बिल्डिंग में मिस राजस्थान 2018, 2019 व 2020 में गोल्ड मेडल जीता। हाल ही में राजस्थान की पहली महिला बॉडी बिल्डर प्रिया सिंह ने थाईलैंड में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। अपनी जीत के बावजूद प्रिया राजस्थान सरकार और उनकी जाति को लेकर हो रहे विवाद पर काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा- एक ओर सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, लेकिन मैं दुनिया में भारत का नाम रोशन करके लौटी तो मुझे किसी ने पूछा तक नहीं ।

सवाल- थाईलैंड में भारत का नाम रोशन करने के बाद आगे के लिए क्या लक्ष्य है ?

जवाब – थाईलैंड में गोल्ड मेडल और प्रो-कार्ड इंटरनेशनल चैंपियनशिप मेरी शुरुआत है, लेकिन मैं यही नहीं रुकना चाहती। मैं यूनिवर्स और ओलंपिया में जाकर भारत और राजस्थान का नाम रोशन करना चाहती हूं।

सवाल- इस मुकाम पर पहुंचने से पहले किस तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ा ?

जवाब- मेरी परेशानियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। परेशानी मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। अगर परेशान नहीं होती है तो जिंदगी में सक्सेस भी नहीं मिल पाती। बस मेरी एक शिकायत है कि लड़कियों के लिए जो नेगेटिव सोच है, उसे पॉजिटिव में बदलने का वक्त आ गया है। जो काम बेटे कर रहे हैं, अब वह काम बेटियां भी कर सकती हैं। आज मैं जो भी कुछ हूं, वह जनता के सम्मान की वजह से हूं। इसलिए मैं चाहती हूं कि जितना सम्मान जनता ने मुझे दिया है। उतना हर बेटी को दिया जाए।

सवाल- घूंघट से बिकिनी तक का सफर कैसे तय किया?

जवाब- मैं भी आम महिलाओं की तरह ही साड़ी और घूंघट में रहती थी, लेकिन बॉडी-बिल्डिंग में करियर बनाने की चाहत ने मेरी ड्रेसिंग स्टाइल को बदल दिया। बॉडी-बिल्डिंग की शुरुआत में ही मैंने घर वालों को स्पोर्ट्स ब्रा, शॉर्ट्स और बिकिनी दिखाई थी।

उस वक्त मैंने उन्हें बताया था कि स्टेट चैंपियनशिप तक स्पोर्ट्स ब्रा और शॉर्ट्स पहन कर शामिल हो सकते हैं, लेकिन नेशनल और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में शामिल होने के लिए बिकिनी पहननी पड़ती है। मैं किस चैंपियनशिप की तैयारी करूं या फिर बॉडी-बिल्डिंग छोड़ दूं? तब घरवालों ने मुझे दोनों चैंपियनशिप की तैयारी करने के लिए कहा था।

सवाल- क्या आपको कभी बॉडी-बिल्डिंग या फिर कपड़ों को लेकर ताने सुनने पड़े?

जवाब- हां, जब मैं बॉडी-बिल्डिंग करने लगी, तब लोगों ने मुझे काफी ताने दिए। कुछ कहते थे कि बिकिनी में खड़ी हो जाती हो। तुम्हें शर्म नहीं आती। वहीं कुछ लोग मुझे आदमी कहकर बुलाते थे। मेरे रिश्तेदारों ने भी मुझे बॉडी-बिल्डिंग छोड़कर अपना घर और बच्चे संभालने

मेरा भाई इतना नाराज हो गया था कि उसने भी मुझसे रिश्ता तोड़ मुझे मारने तक की धमकी दी, लेकिन मैं नहीं रुकी और आज उन सब को मुझ पर गर्व है

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